धर्म शास्त्र

धर्म शास्त्र क्या है?

'धर्म' शब्द संस्कृत के 'ध्रू' धातु से बना है, जिसका अर्थ धारण करना होता है। धर्मशास्त्र के अनुसार मानव जीवन में 16 संस्कार बताए गए हैं। यह शास्त्रों में वर्णित है। मानव गर्भाधान से लेकर दफनाने तक के कर्मकांडों का वर्णन धर्मशास्त्र के विभिन्न ग्रंथों में कर्मकांडों के साथ किया गया है।

सारे त्यौहार, समारोह विविध व्रतों के बारे में, कब और कैसे मनाया जाये इसका वर्णन धर्मशास्त्र में किया गया है। 

अपने त्यौहार तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, तारीख के अनुसार नहीं। दशहरा, दिवाली, गणपति आदि।

इस उत्सव के दिन वास्तव में क्या करें? क्या दान करें? किस प्रकार की पूजा करनी चाहिए? इसका आध्यात्मिक मूल्य क्या है आदि धर्मशास्त्र में दिया गया है।

उदाहरण के लिए, कई लोग संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं। पर यह पर्याप्त नहीं है। हमें गणपति और चंद्र को विभिन्न मंत्रों से ‘अर्घ्य’ देना चाहिए।

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हमारे जीवन में पुण्य प्राप्त करने और पापों का प्रायश्चित करने के लिए शास्त्र हमें विभिन्न तरीकों से मार्गदर्शन करते हैं। इसका पूरा विवरण धर्मशास्त्र में दिया गया है। कहा जाता है कि प्रकृति और ऋतु के अनुसार विभिन्न त्यौहारों में भगवान को पत्ते, फूल और फल अर्पण करना है। 

इसी प्रकार व्यक्ति के जन्म और मृत्यु के बाद क्रमश: जननाशौच और सूतक  (मृताशौच) का पालन करने की प्रथा है। इस काल में क्या करें और क्या न करें, इसका वर्णन मनुस्मृति, पराशर स्मृति, देवल स्मृति, धर्मसिंधु आदि में विस्तार से किया गया है।