कुंडली मिलान

ज्योतिषीय मार्गदर्शन

ज्योतिष वह विज्ञान है जो खगोलीय पिंडों (तारों और ग्रहों) की गति और सापेक्ष स्थिति का अध्ययन करके मानव जीवन और स्थलीय घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करने का दावा करता है।

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विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करते समय आपने लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि “शादी-विवाह दो गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं है”। मनुष्य के जीवन में शादी एक बार ही होती है, इसीलिए लोग चाहते हैं उनकी ज़िन्दगी में जो जीवनसाथी आए वह सर्वगुण संपन्न हो। विवाह दो लोगों के बीच का एक संबंध है जो आने वाले 7 जन्मों तक उन्हें एक दूसरे के साथ जोड़ देता है। शादी चाहे लव हो या अरेंज, हमेशा कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनके पूरा होने के बाद ही शादी कराई जाती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण होता है कुंडली मिलान। हमारे बड़े-बुज़ुर्गों और कुछ अनुभवी लोगों के अनुसार शादीशुदा ज़िन्दगी खुशहाल रहे इसके लिए विवाह से पूर्व कुंडली मिलान बेहद जरुरी है।

गुण मिलान का वास्तविक अर्थ

कुंडली मिलान में सबसे पहला कार्य गुण मिलान का होता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में आठ तरह के गुणों और अष्टकूट का मिलान किया जाता है। शादी में गुण मिलान बेहद आवश्यक होता है। ये गुण है – वर्ण, वश्य, तारा, योनि, गण, भकूट और नाड़ी । इन सब के मिलान के बाद कुल 36 अंक होते है। विवाह के समय यदि वर-वधु दोनों की कुंडली में 36 में से 18 गुण मिलते हैं तो यह माना जाता है कि शादी सफल रहेगी। ये 18 गुण स्वास्थ, दोष, प्रवृति, मानसिक स्थिति, संतान आदि से सम्बंधित होते हैं।

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